भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा उछाल—राफेल को मिलेंगी नई ‘मेटेओर’ मिसाइलें, पाकिस्तान की हवाई रणनीति पर पड़ेगा गहरा असर
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पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, उसकी गूंज अब रक्षा रणनीति में भी सुनाई दे रही है। भारतीय वायुसेना अब अपनी हवाई मारक क्षमता को दोगुना करने की तैयारी में है, और इसके केंद्र में है यूरोपीय तकनीक से लैस ‘मेटेओर’ मिसाइलें।
राफेल को मिलेगा नया हथियार
सरकारी सूत्रों के अनुसार, MBDA कंपनी से मेटेओर मिसाइलों की बड़ी खेप खरीदने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय में अंतिम चरण में है। ये मिसाइलें बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) श्रेणी की हैं, जो दुश्मन को देखे बिना ही सटीक निशाना लगाने में सक्षम हैं। रैमजेट प्रणोदन प्रणाली के कारण इनकी गति और दूरी दोनों ही असाधारण हैं, जिससे “पहला वार, पहली जीत” की रणनीति को मजबूती मिलती है।
ऑपरेशन सिंदूर की सीख
मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के आतंकी अड्डों को लंबी दूरी से निशाना बनाया, जबकि पाकिस्तानी वायुसेना ने चीनी PL-15 मिसाइलों से जवाबी हमला किया, जो विफल रहा। इस अनुभव ने भारत को अपनी मिसाइल प्रणाली को और उन्नत करने की प्रेरणा दी।
स्वदेशी ताकत भी बढ़ेगी
राफेल के अलावा सुखोई-30 और तेजस जैसे स्वदेशी विमानों पर DRDO की ‘अस्त्र मार्क-2’ मिसाइलें लगाई जाएंगी, जिनकी मारक क्षमता 200 किलोमीटर से अधिक होगी। साथ ही, राफेल बेड़े को भविष्य में स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइलों से भी लैस किया जाएगा, जिससे दुश्मन के रडार और संचार प्रणाली को निष्क्रिय किया जा सके।
नौसेना को भी मिलेगा लाभ
भारतीय नौसेना के लिए आदेशित 26 राफेल मरीन जेट्स में भी मेटेओर मिसाइलें शामिल की जाएंगी, जिससे समुद्री क्षेत्र में भी भारत की हवाई ताकत को बढ़ावा मिलेगा।
रणनीतिक बढ़त
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेटेओर मिसाइलों की नई खेप भारत को हवाई युद्ध में निर्णायक बढ़त दिलाएगी। यह न केवल पाकिस्तान बल्कि किसी भी संभावित दुश्मन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब सिर्फ जवाब नहीं देता—वह पहले से तैयार रहता है।
