कोविड बाद सबसे तेज़ ग्रोथ वाली अर्थव्यवस्था: भारत ने अमेरिका-चीन को छोड़ा पीछे
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कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया था। अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे महाशक्तिशाली देशों की जीडीपी गहरे संकट में चली गई। लेकिन इसी दौर में भारत ने न केवल गिरावट को सीमित रखा, बल्कि महामारी के बाद की रिकवरी में दुनिया को चौंका दिया। यही कारण है कि आज भारत को कोविड बाद सबसे तेज़ ग्रोथ वाली अर्थव्यवस्था कहा जा रहा है।
हार्वर्ड का आकलन और वैश्विक मान्यता
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेसन फर्मन ने हाल ही में साझा किए गए डेटा में भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताया है। उनके अनुसार, 2019 से 2025 की तीसरी तिमाही तक भारत की जीडीपी न केवल महामारी से पहले की रफ्तार को पकड़ लेगी, बल्कि उसे पार करते हुए 10 प्रतिशत तक पहुँच जाएगी।
अमेरिका की वृद्धि दर इसी अवधि में लगभग 5% रहेगी।
चीन और यूरोप क्रमशः -10% और -5% पर रहेंगे।
रूस की जीडीपी सकारात्मक बनी रहेगी, लेकिन उसकी गति धीमी होगी।
यह तुलना साफ करती है कि भारत ने महामारी के बाद आर्थिक महाशक्तियों को पीछे छोड़ दिया है।
भारत की मजबूती के स्तंभ
भारत की इस तेज़ रफ्तार के पीछे कई ठोस कारण हैं:
डिजिटल क्रांति: यूपीआई जैसे डिजिटल भुगतान तंत्र ने लेनदेन को आसान और पारदर्शी बनाया।
बुनियादी ढांचा निवेश: सड़कों, रेल और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खर्च ने विकास को गति दी।
निर्यात की ताकत: आईटी और फार्मा सेक्टर ने वैश्विक मांग को पूरा कर भारत की स्थिति मजबूत की।
आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन: महामारी से ध्वस्त सप्लाई चेन को भारत ने तेजी से पटरी पर लाया।
भविष्य की दिशा
रेटिंग एजेंसियों और अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि भारत आने वाले दशकों में लगातार तेज़ी से बढ़ेगा।
2032 तक भारत 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है।
2047 तक भारत 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।
ICRA, Moody’s और अन्य एजेंसियों ने अगले वर्षों में भारत की जीडीपी वृद्धि को 6.4% से 7.8% के बीच मजबूत रहने का अनुमान जताया है।
भारत की आर्थिक पहचान
भारत की कहानी केवल आँकड़ों की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और दूरदर्शिता की है। महामारी के बाद जब दुनिया ठहर गई थी, भारत ने अवसरों को पहचाना और उन्हें विकास में बदल दिया। यही कारण है कि आज भारत को कोविड बाद सबसे तेज़ ग्रोथ वाली अर्थव्यवस्था कहा जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल भारत की जनता की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह संदेश भी है कि आने वाले दशकों में भारत वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की नई परिभाषा लिखेगा।


