कोयला माफिया पर ईडी का शिकंजा: बंगाल-झारखंड में ताबड़तोड़ छापेमारी

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11/21/20251 min read

अवैध कोयला खनन और उसके परिवहन-भंडारण के गहरे जाल पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार सुबह बड़ा वार किया। सुबह करीब छह बजे शुरू हुए इस अभियान में ईडी के 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए, जिन्होंने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर, पुरुलिया, हावड़ा और कोलकाता जिलों में 24 परिसरों पर एक साथ छापेमारी की।

बड़े नामों पर कार्रवाई

जिन परिसरों की तलाशी ली जा रही है, वे नरेंद्र खड़का, युधिष्ठिर घोष, कृष्ण मुरारी कयाल, चिन्मयी मंडल, राजकोष यादव और अनिल गोयल जैसे नामों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इन पर लंबे समय से कोयला माफिया नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप हैं।

आवास से लेकर अवैध टोल तक

ईडी की टीमों ने जिन परिसरों पर दस्तक दी, उनमें आलीशान आवासीय संपत्तियां, कार्यालय, कोक संयंत्र और अवैध टोल संग्रह बूथ/चेक पोस्ट/नाका शामिल हैं। यह कार्रवाई केवल संपत्तियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को निशाना बनाया गया जो अवैध खनन से लेकर परिवहन और वसूली तक फैला हुआ है।

करोड़ों की बरामदगी

अब तक की कार्रवाई में पश्चिम बंगाल स्थित परिसरों से 8 करोड़ रुपये से अधिक नकदी और सोना/आभूषण जब्त किए गए हैं। वहीं झारखंड में ईडी की टीमों ने 2.2 करोड़ रुपये से अधिक नकदी और 120 भूमि के कागजात बरामद किए हैं। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि कोयला माफिया का कारोबार केवल खदानों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन-जायदाद और नकदी के गुप्त भंडार तक फैला हुआ है।

समन्वित अभियान

ईडी की यह कार्रवाई झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैले कोयला माफियाओं के खिलाफ एक समन्वित अभियान का हिस्सा है। कुल मिलाकर 40 से अधिक परिसरों पर छापेमारी की जा रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि एजेंसी इस बार पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के इरादे से उतरी है।

ईडी का प्रहार: कोयला माफिया की गहराई उजागर

कोयला माफिया पर ईडी की यह ताबड़तोड़ छापेमारी न केवल अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ सख्त संदेश है, बल्कि यह भी दिखाती है कि भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ एजेंसी अब बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। बंगाल और झारखंड में फैले इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं, यह तो आगे की जांच से स्पष्ट होगा, लेकिन शुरुआती बरामदगी ही इस काले कारोबार की भयावहता को उजागर कर रही है।