पुरी धाम में देव दीपावली: महाप्रभु का पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का अनोखा संदेश

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11/20/20251 min read

ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर में देव दीपावली उत्सव का शुभारंभ हो चुका है। मार्गसीरा माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी से प्रारंभ होकर तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि मानव जीवन की परंपराओं और संस्कारों को देवत्व से जोड़ने वाला अद्वितीय उत्सव भी है।

इन तीन दिनों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा सफेद वस्त्र धारण कर अपने दिव्य पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं। मंदिर परिसर दीपों की ज्योति से आलोकित हो उठता है, मानो देवता स्वयं अपने पूर्वजों के सम्मान में दीपदान कर रहे हों। यह दृश्य भक्तों को यह संदेश देता है कि महाप्रभु भी उन परंपराओं का पालन करते हैं जिन्हें साधारण मनुष्य निभाता है।

भाजपा सांसद संबित पात्रा ने इस अवसर पर कहा कि देव दीपावली की यह परंपरा इस बात का प्रमाण है कि महाप्रभु स्वयं को इंसानों के बीच एक इंसान की तरह प्रस्तुत करते हैं। वे यह संदेश देते हैं कि “मैं भी हर कदम पर आपके साथ खड़ा हूं।”

श्राद्ध बेशा में भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन का दर्शन भक्तों के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणादायी होता है। तीन दिनों तक अलग-अलग दिव्य पूर्वजों के लिए दीपदान और श्राद्ध की रस्में पूरी की जाती हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता जीवन का अनिवार्य हिस्सा है।

पुरी की देव दीपावली इस प्रकार केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत संगम है—जहां देवता और भक्त एक ही भावभूमि पर खड़े दिखाई देते हैं।