वंदे मातरम् के 150 वर्ष: भारत की आत्मा का उत्सव, राष्ट्रभक्ति का नवसंगीत

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11/7/20251 min read

आज, 7 नवंबर 2025 को भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् ने अपने गौरवशाली 150 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है—जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में क्रांतिकारियों को जोड़ा, जनमानस को जगाया और मातृभूमि के लिए बलिदान की भावना को प्रज्वलित किया।

अमित शाह का संदेश: “वंदे मातरम्” है भारत की आत्मा

गृहमंत्री अमित शाह ने इस ऐतिहासिक अवसर पर सोशल मीडिया पर लिखा: “वंदे मातरम् केवल शब्दों का संग्रह नहीं, यह भारत की आत्मा का स्वर है। इसने अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध देश को संगठित किया और आज़ादी की चेतना को बल दिया।” उन्होंने देशवासियों से अपील की कि इस गीत के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गान करें, ताकि यह प्रेरणा भावी पीढ़ियों तक पहुंचे।

150 स्थानों पर सामूहिक गायन: राष्ट्र एकता का उत्सव

भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार ने पूरे देश में 150 स्थानों पर वंदे मातरम् के सामूहिक गायन का आयोजन किया है। इसे राष्ट्र एकता का उत्सव नाम दिया गया है, जिसमें सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से गीत की ऐतिहासिक और भावनात्मक गहराई को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

बंगाल में विशेष आयोजन: संस्कृति और अस्मिता का संगम

पश्चिम बंगाल में इस कार्यक्रम को विशेष रूप से मनाया जा रहा है। 1100 स्थानों पर सामूहिक गायन की योजना बनाई गई है। इसे बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और अस्मिता को सम्मान देने के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि कुछ स्थानों पर विरोध की आवाज़ें भी उठी हैं, लेकिन आयोजन की व्यापकता इस गीत की सार्वभौमिक स्वीकार्यता को दर्शाती है।

कैबिनेट का निर्णय: राष्ट्रीय गीत को जन-जन तक पहुंचाने की पहल

1 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस उत्सव को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का निर्णय लिया। इसके तहत:

  • स्कूलों, कॉलेजों और सांस्कृतिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम

  • वंदे मातरम् के इतिहास पर प्रदर्शनी और संगोष्ठियाँ

  • डिजिटल माध्यमों से गीत का प्रचार और सामूहिक गायन

वंदे मातरम्—एक गीत नहीं, एक चेतना

150 वर्षों से वंदे मातरम् भारत की आत्मा को स्वर देता रहा है। यह गीत आज भी युवाओं में राष्ट्रभक्ति, एकता और नवऊर्जा का स्रोत बना हुआ है। आइए, इस स्मरणोत्सव पर हम सब मिलकर इसका सामूहिक गान करें—अपने परिजनों के साथ, अपने समुदाय के साथ—ताकि यह गीत केवल इतिहास न रहे, बल्कि भविष्य की प्रेरणा बन जाए।

वंदे मातरम्!