भारत की आपदा तैयारी नई ऊंचाइयों पर
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चंडीमंदिर में पश्चिमी कमान आपदा प्रबंधन कॉन्क्लेव का सफल आयोजन
नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026– भारत की सुरक्षा और मानवीय सहायता ढांचे को नई दिशा देने वाला पश्चिमी कमान आपदा प्रबंधन कॉन्क्लेव, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सहयोग से चंडीमंदिर मिलिट्री स्टेशन में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन ने देश को “प्रतिक्रियात्मक” मॉडल से हटाकर “प्रोएक्टिव” आपदा प्रबंधन वास्तुकला की ओर ले जाने का संकल्प प्रस्तुत किया। सैन्य नेतृत्व, नीति निर्माता और शैक्षणिक विशेषज्ञों का यह संगम भारत की आपदा तैयारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रतीक बना।
रणनीतिक नागरिक-सैन्य तालमेल
कार्यक्रम की शुरुआत उच्च-स्तरीय संबोधनों से हुई, जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के विजन को स्पष्ट किया। उद्घाटन भाषण एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने दिया। इसके बाद एनडीएमए के सदस्य और विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने मुख्य भाषण प्रस्तुत किया। पश्चिमी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय सेना की “पसंदीदा उत्तरदाता” की भूमिका पर जोर दिया।
संवाद का केंद्र ‘सैन्य-नागरिक संलयन’ रहा, जहां एनडीएमए के सचिव मनीष भारद्वाज और 11वीं कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया ने राहत कार्यों में “गोल्डन ऑवर” के महत्व और प्रोटोकॉल सामंजस्य पर चर्चा की।
तकनीकी नवाचार और परिचालन सबक
संगोष्ठी का मुख्य आकर्षण आपदा शासन में अत्याधुनिक तकनीक का एकीकरण रहा। डॉ. काला वेंकट उदय (IIT मंडी) ने रिमोट सेंसिंग और भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणालियों की सफलताओं को साझा किया। वहीं, मोहम्मद अफजल (संयुक्त सचिव, विद्युत मंत्रालय) ने जलविद्युत नदी घाटियों की भेद्यता कम करने के उपायों पर प्रकाश डाला।
एनडीआरएफ की 7वीं बटालियन के कमांडेंट संतोष कुमार ने 2025 की बाढ़ के दौरान संसाधनों की जुटान और रीसाइक्लिंग की चुनौतियों का आलोचनात्मक विश्लेषण किया। उन्होंने भविष्य की शहरी और ग्रामीण बाढ़ों के लिए ठोस समाधान प्रस्तावित किए।
एआई फ्रंटियर और राज्य स्तरीय ढांचे
एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर केंद्रित पैनल चर्चा में के.के. पंत (अतिरिक्त मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश), स्नोबर जमील (एसडीएमए, जम्मू-कश्मीर) और मोहसिन शहीदी (डीआईजी ऑप्स, मुख्यालय एनडीआरएफ) ने भाग लिया। इस सत्र में राज्य-स्तरीय ढांचों की कमियों और एआई-आधारित आपदा प्रबंधन की संभावनाओं पर गहन विमर्श हुआ।
नवाचार का प्रदर्शन
तकनीकी सत्रों के साथ-साथ आयोजित प्रदर्शनी ने भारत की स्वदेशी क्षमताओं का जीवंत प्रदर्शन किया। इसमें एआई-एकीकृत पूर्व चेतावनी प्रणाली और उपग्रह-लिंक्ड संचार मॉड्यूल प्रमुख आकर्षण रहे, जो नेटवर्क ठप होने पर भी सक्रिय रहते हैं।
विशेष उपकरणों में उच्च ऊंचाई वाले बचाव गियर, सीबीआरएन सुरक्षा सूट और उन्नत चिकित्सा ट्रॉमा किट शामिल थे। साथ ही, सामुदायिक आउटरीच कार्यक्रमों ने स्थानीय आबादी को रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में सशक्त बनाने की दिशा में ठोस पहल की।
भविष्य का विजन
संगोष्ठी ने 2026 के लिए ठोस “एक्शन पॉइंट्स” तय किए, जिनमें संयुक्त प्रशिक्षण कैलेंडर और एकीकृत कमांड संरचना शामिल है। नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि “चंडीमंदिर में देखा गया तालमेल राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारत के एकीकृत दृष्टिकोण का प्रमाण है। हम एक ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जहाँ तकनीक, रणनीति और मानवीय साहस मिलकर ‘जीरो-फेल मिशन’ सुनिश्चित करते हैं।”


