बसंत पंचमी पर माघ मेले में आस्था का महाकुंभ, गजकेसरी योग में श्रद्धालुओं की त्रिवेणी डुबकी

CULTURE

1/23/20261 min read

प्रयागराज, 23 जनवरी 2026– संगम नगरी प्रयागराज की रेती पर बसे माघ मेले में बसंत पंचमी के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। चौथे स्नान पर्व पर लाखों श्रद्धालु गजकेसरी योग में त्रिवेणी की पवित्र धारा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ, बल्कि पीले वस्त्रों और सरस्वती वंदना के साथ पूरा मेला क्षेत्र आस्था के रंग में रंग गया।

श्रद्धालुओं का सैलाब और गजकेसरी योग का महत्व

गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। संत-महात्मा से लेकर साधारण भक्त तक पीले वस्त्र धारण कर स्नान कर रहे हैं। इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति ने बसंत पंचमी को और भी खास बना दिया है। गजकेसरी योग और शिवयोग का संयोग इस पर्व को विशेष बना रहा है। मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से बुद्धिबल का विकास होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कल्पवासी और विद्यार्थी पीला चंदन लगाकर स्नान कर रहे हैं, जिससे बाहरी शरीर के साथ ही आंतरिक काया का भी शुद्धिकरण होता है।

सरस्वती पूजन और सांस्कृतिक रंग

माघ मेले में संतों के पंडालों और विभिन्न स्थलों पर ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा हो रही है। बसंत पंचमी को विद्या और कला का पर्व माना जाता है, इसलिए श्रद्धालु स्नान के साथ ही मां सरस्वती की आराधना कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में पीले वस्त्रों और सरस्वती वंदना की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो उठा है। अनुमान है कि इस पर्व पर 55 से 60 लाख श्रद्धालु स्नान करेंगे, जबकि प्रशासन का अनुमान है कि 26 जनवरी तक साढ़े तीन करोड़ से अधिक लोग संगम में डुबकी लगाएंगे।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं की सख्ती

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए मेला प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। माघ मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में सात सेक्टरों में बसाया गया है। साढ़े तीन किलोमीटर लंबे घाट बनाए गए हैं और पहली बार नौ पान्टून ब्रिज स्थापित किए गए हैं। 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें 150 कैमरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हैं। मेला क्षेत्र को प्लास्टिक फ्री घोषित किया गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चकर्ड प्लेटों से सड़कें बनाई गई हैं। ठंड को देखते हुए अलाव और रैन बसेरे की व्यवस्था भी की गई है। सुरक्षा में पुलिस, पीएसी, पैरामिलिट्री, यूपी एटीएस, एसटीएफ, जल पुलिस, गोताखोर और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं।

ड्रोन से निगरानी और ट्रैफिक प्रबंधन

पूरे माघ मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से की जा रही है। संगम के गहरे जल में भी जल पुलिस और बचाव दल मौजूद हैं। स्नान पर्व को देखते हुए ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया है ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के स्नान कर सकें और सुरक्षित लौट सकें। पुलिस कर्मियों को श्रद्धालुओं और साधु-संतों के साथ शालीन व्यवहार की हिदायत दी गई है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं।

महाशिवरात्रि तक चलेगा माघ मेला

संगम की रेती पर आस्था का यह महाकुंभ 15 फरवरी को महाशिवरात्रि तक जारी रहेगा। बसंत पंचमी के इस स्नान पर्व ने माघ मेले की भव्यता और श्रद्धा को नई ऊंचाई दी है। आस्था, सुरक्षा और सांस्कृतिक रंगों से सजा यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव का अद्वितीय अवसर बन गया है।