पंजाब में नशे का कहर: एक ही परिवार के सात चिराग बुझ गए, बीजेपी का मान सरकार पर हमला
STATE
लुधियाना, 20 जनवरी 2026– लुधियाना के शेरेवाल गांव से उठी यह खबर सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पंजाब में नशे की जड़ों तक फैली भयावह सच्चाई का आईना है। जसवीर सिंह की ओवरडोज से हुई मौत ने उस घर की आखिरी रोशनी भी बुझा दी, जहां पहले ही छह बेटे और पिता नशे की गिरफ्त में अपनी जान गंवा चुके थे। अब अकेली बची मां शिंदर कौर के आंसुओं में पंजाब की असफल लड़ाई की गवाही छिपी है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
साल 2012 में मुख्तियार सिंह की शराब की लत ने उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया। इसके बाद घर की जिम्मेदारी उनकी पत्नी शिंदर कौर पर आ गई। लेकिन नशे के जाल ने उनके छह बेटों को भी एक-एक कर निगल लिया। गुरदीप, जसवंत, बलजीत, राजू, कुलवंत और आखिर में जसवीर—सभी की मौत नशे की वजह से हुई। अब इस परिवार में कोई पुरुष सदस्य जीवित नहीं है।
बीजेपी का हमला, सरकार पर सवाल
पंजाब बीजेपी के वर्किंग प्रेसिडेंट अश्विनी शर्मा ने शिंदर कौर से मुलाकात कर दुख साझा किया। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि पंजाब में नशा खत्म होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या मौजूदा आम आदमी पार्टी की, किसी ने भी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला।
“नशा खत्म नहीं हुआ, बल्कि बढ़ गया”
अश्विनी शर्मा ने कहा कि पंजाब सरकार नशे के खिलाफ जंग का दावा करती है, लेकिन हकीकत यह है कि युवाओं की जान लगातार जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसे सैकड़ों घर हैं जो नशे की वजह से उजड़ चुके हैं।
मौजूदा सरकार पर निशाना
बीजेपी नेता ने कहा कि पंजाब की जनता ने 2022 में बदलाव की उम्मीद से आम आदमी पार्टी को सत्ता सौंपी थी, लेकिन हालात जस के तस हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद हैरानी की बात है कि एक ही परिवार के सात सदस्य नशे की वजह से मौत के शिकार हो गए।
गांव में अब भी बिक रहा जहर
गांव के लोगों का कहना है कि इलाके में अब भी ड्रग्स खुलेआम बिक रहे हैं। पुलिस ने एक महिला और एक पुरुष के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि नशे का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा।
शिंदर कौर की मांग
मृतकों की मां शिंदर कौर ने बीजेपी नेता से कहा कि उनकी बस यही मांग है कि पुलिस ऐसी कार्रवाई करे जिससे इलाके में नशा बेचने वालों पर रोक लगे। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के सभी बेटे नशे की लत के शिकार हो गए और अब वह अकेली रह गई हैं।
शेरेवाल गांव की यह कहानी पंजाब में नशे की भयावह तस्वीर पेश करती है। सात मौतों का यह सिलसिला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस सामाजिक और राजनीतिक विफलता का प्रतीक है जो पंजाब को नशामुक्त बनाने में असफल रही है। सवाल यह है कि क्या सरकारें अब भी जागेंगी, या शिंदर कौर जैसी माताओं के आंसू यूं ही बहते रहेंगे।


