अनंतनाग में लश्कर की परछाई: दो संदिग्ध आतंकी CCTV में कैद
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सेना-पुलिस का संयुक्त अभियान, 20 घंटे से जारी तलाशी; पाकिस्तान से बढ़ते आतंकी गठजोड़ पर खुफिया अलर्ट
नई दिल्ली, 26 दिसंबर 2025– कश्मीर की वादियों में दिसंबर की ठंडक के बीच अचानक एक नई बेचैनी फैल गई है। अनंतनाग में लश्कर-ए-तैयबा के दो संदिग्ध आतंकी देखे गए हैं। सीसीटीवी फुटेज में दर्ज इन चेहरों ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। यह महज एक दृश्य नहीं, बल्कि उस खतरे की झलक है जो घाटी की शांति को चुनौती दे रहा है।
सीसीटीवी फुटेज से खुला सुराग
लश्कर का आतंकी मोहम्मद लतीफ और उसके साथ एक पाकिस्तानी साथी को अनंतनाग की गलियों में घूमते हुए देखा गया। फुटेज सामने आते ही सेना और पुलिस की टीमें सक्रिय हो गईं। बीते 20 घंटे से इलाके में लगातार तलाशी अभियान चल रहा है। एक निजी टीवी चैनल के पास मौजूद विशेष फुटेज ने इस अभियान को और तेज कर दिया है। सुरक्षाबल स्थानीय लोगों से पूछताछ कर हर सुराग को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
सेना-पुलिस का संयुक्त अभियान
अनंतनाग की गलियों में अब हर कदम पर चौकसी है। सेना और पुलिस की टीमें मिलकर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। यह अभियान केवल दो संदिग्धों की तलाश नहीं, बल्कि उस नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश है जो घाटी में आतंक का जाल बुन रहा है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साझा करें।
पाकिस्तान से जारी भर्ती का खेल
यह घटना उस बड़ी साजिश का हिस्सा लगती है जिसकी जड़ें पाकिस्तान में हैं। हाल ही में खबर आई थी कि वहां के आतंकी संगठन लगातार युवाओं को गुमराह कर नई भर्तियां कर रहे हैं। जैश-ए-मोहम्मद ने पीओके के दादयाल में रैली आयोजित कर हमास आतंकियों को सम्मानित किया। यह रैली केवल प्रतीक नहीं थी, बल्कि आतंकी संगठनों के बीच बढ़ते गठजोड़ का ऐलान थी।
हमास से प्रेरणा, नई ट्रेनिंग
29 नवंबर की रैली में जैश का टॉप कमांडर इलियास कश्मीरी मौजूद था। मंच से दिए गए भाषणों में साफ कहा गया कि हमास से प्रेरणा लेकर आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा। इंटेल इनपुट बताते हैं कि जैश के आतंकियों को अब हमास स्टाइल में हमले करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। यह रणनीति घाटी में आतंक का नया चेहरा गढ़ने की कोशिश है।
पहलगाम हमले में दिखा पैटर्न
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने इस पैटर्न को उजागर कर दिया था। पॉइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारना, गुठनों के बल बिठाकर सिर और गर्दन पर निशाना साधना—यह सब हमास की शैली से मेल खाता था। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक हमले से पहले पीओके में 5 फरवरी को हमास और लश्कर की बैठक हुई थी। यह पहली बार था जब दोनों आतंकी संगठनों ने एक साथ सम्मेलन किया।
आतंक का नया गठबंधन
लश्कर ने खुद हमास के आतंकियों को आमंत्रित किया था। सम्मेलन में हमास के खालिद कदुमी और नाजी जहीर मौजूद थे। यह साझेदारी केवल विचारों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि आतंक की नई रणनीति का खाका है। अनंतनाग में दिखे दो संदिग्ध उसी खाके का हिस्सा हो सकते हैं। घाटी की शांति को बचाने के लिए अब सुरक्षा एजेंसियों को इस गठबंधन की जड़ों तक पहुंचना होगा।


