महिला क्रिकेट टीम से नौ दुर्गा तक—काशी की शिव बारात बनी शक्ति महोत्सव

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12/13/20251 min read

विश्वनाथ धाम के चार वर्ष: आस्था, विकास और महिला शौर्य की भव्य झांकी

वाराणसी, 13 दिसंबर 2025– काशी नगरी ने एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भव्यता से देशभर का ध्यान खींचा। बाबा विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के चार वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित शिव बारात इस बार केवल धार्मिक आस्था का उत्सव नहीं रही, बल्कि यह नारी शक्ति, आधुनिक विकास और परंपरा के अद्भुत संगम का जीवंत चित्रण बन गई।

महिला क्रिकेट टीम से लेकर वीरांगनाओं की झांकी

शोभायात्रा में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्व कप विजेता झांकी ने सबका मन मोह लिया। यह केवल खेल उपलब्धि का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि भारतीय नारी किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। रानी अहिल्याबाई होल्कर, महारानी लक्ष्मीबाई और रानी पद्मावती जैसी ऐतिहासिक वीरांगनाओं की झलकियों के साथ आधुनिक भारत की बेटियां—कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह—का साहस भी झांकियों में दिखाई दिया। यह दृश्य नारी शक्ति के शौर्य और आत्मविश्वास का सशक्त प्रतीक बन गया।

विकास और परंपरा का मेल

काशी के विकास की कहानी भी शोभायात्रा में झांकी के रूप में सामने आई। रोपवे की उड़ान ने आधुनिक काशी का चेहरा दिखाया, वहीं वृंदावन की झांकी और बाबा विश्वनाथ के विविध रूपों ने परंपरा की गहराई को उजागर किया। नौ दुर्गा के नौ विकराल रूपों का दर्शन श्रद्धालुओं के लिए अद्वितीय अनुभव रहा। माता वैष्णो देवी की अखंड ज्योति ने आस्था को और प्रज्वलित किया।

महिलाओं की व्यापक भागीदारी

नगर की 55 महिला संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि आज महिलाएं केवल दर्शक नहीं, बल्कि आयोजनों की धुरी बन चुकी हैं। उनकी उपस्थिति ने शोभायात्रा को ‘महिला शक्ति महोत्सव’ का रूप दे दिया।

बैंड-बाजों और जयकारों से गूंजी काशी

ढोल-नगाड़ों, ताशों और डमरू दलों की गूंज ने शिव बारात को जीवंत कर दिया। हर-हर महादेव के जयकारों के बीच पुष्पवर्षा होती रही। अग्रवाल, मारवाड़ी, गुजराती, मराठा, केशरवानी और खत्री समाज ने न केवल भागीदारी की बल्कि श्रद्धालुओं के लिए जलपान और शरबत की व्यवस्था भी की। पूरा मार्ग मानो किसी महोत्सव में बदल गया।

नारी शक्ति और शिवत्व का संगम

काशी की यह शिव बारात केवल धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह नारी शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक विकास का संगम बनकर सामने आई। बाबा विश्वनाथ के आंगन में जब नौ दुर्गा के रूप, महिला क्रिकेट टीम की झांकी और वीरांगनाओं का साहस एक साथ दिखाई दिया, तो यह स्पष्ट हो गया कि काशी की आत्मा परंपरा से जुड़ी है, पर उसकी दृष्टि भविष्य की ओर भी उतनी ही दृढ़ता से देख रही है।