गगनयान मिशन 2027 में करेगा इतिहास रचने की उड़ान, ISRO प्रमुख ने खोले अंतरिक्ष योजनाओं के पत्ते

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10/15/20251 min read

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2025। भारत का बहुप्रतीक्षित मानव अंतरिक्ष यान मिशन ‘गगनयान’ अब 2027 की पहली तिमाही में लॉन्च के लिए तैयार हो रहा है। इसरो प्रमुख वी नारायणन ने बुधवार को एक विशेष बातचीत में देश की अंतरिक्ष योजनाओं का खाका पेश करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशानुसार 2040 तक भारतीयों को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य तय किया गया है।

नारायणन ने बताया कि गगनयान मिशन से पहले तीन मानवरहित उड़ानों की योजना है, जिनमें पहला मिशन दिसंबर 2025 में अर्ध-मानव रोबोट ‘व्योममित्र’ के साथ अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसके बाद 2026 में दो और मानवरहित मिशन होंगे, जो मानवयुक्त उड़ान की नींव मजबूत करेंगे।

चंद्रमा पर भारतीय कदम और अंतरिक्ष स्टेशन की तैयारी

इसरो प्रमुख ने खुलासा किया कि 2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन BAS स्थापित हो जाएगा, जिसका पहला मॉड्यूल 2027 की शुरुआत में ही अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। साथ ही, शुक्र ग्रह के अध्ययन के लिए ‘वीओएम’ मिशन को भी मंजूरी मिल चुकी है।

नारायणन ने कहा, “प्रधानमंत्री ने एक स्पष्ट रोडमैप दिया है, जिससे हम आत्मनिर्भर और जीवंत अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं।”

आदित्य-L1 से मिले 15 टेराबिट सौर डेटा, 300 से ज्यादा स्टार्टअप सक्रिय

इसरो प्रमुख ने बताया कि आदित्य-L1 मिशन ने अब तक 15 टेराबिट से अधिक सौर डेटा एकत्र किया है, जिससे कोरोनाल मास इजेक्शन और अंतरिक्ष मौसम की बारीकियों को समझने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि आज देश में 300 से ज्यादा स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं और डेटा विश्लेषण में योगदान दे रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए तैयार भारत

नारायणन ने कहा कि भारत जलवायु विज्ञान, आत्मनिर्भरता और वैश्विक अनुसंधान के लिए प्रतिबद्ध है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग को वैज्ञानिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर तय किया जाएगा।

आगामी मिशन: चंद्रयान-4, चंद्रयान-5, नया मंगल अभियान और AXOM वेधशाला

इसरो की आगामी परियोजनाओं में चंद्रमा और मंगल पर नए मिशन के साथ-साथ AXOM नामक एक उच्च प्राथमिकता वाला खगोलीय वेधशाला मिशन भी शामिल है, जो भारत की अंतरिक्ष शक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

भारत की अंतरिक्ष यात्रा अब केवल कल्पना नहीं, बल्कि ठोस योजनाओं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है।